गीत ने मेरे तुम्हें फिर से पुकारा
स्वप्न जागे, रात सोई,
याद ने माला पिरोई
घन-तिमिर में अश्रुओं ने
आज रूखी आँख धोई
जो लिखी पल ने कहानी
चितवनों ने आज खोई
रागिनी ने तार में खुद को सँवारा
गीत ने मेरे तुम्हें फिर से पुकारा
प्राण में बस एक तुम ही
श्वाँस औ' प्रश्वास तुम ही
चित्त के प्रस्तर तले भी
एक ही अहसास तुम ही
बिम्ब में प्रतिबिम्ब में भी
रूप का प्रतिभास तुम ही
लौट आया है वही मधुमास प्यारा
गीत ने मेरे तुम्हें फिर से पुकारा
श्वाँस में निशिगंध भर लो
प्राण में उल्लास धर लो
पुष्प के शुभ आभरण की
वेणि से श्रृंगार कर लो
यामिनी ना बीत जाए
प्यार से गलबाँह भर लो
इस हृदय में नाम केवल है तुम्हारा
गीत ने मेरे तुम्हें फिर से पुकारा
रामनारायण सोनी
२६.१२.२४
No comments:
Post a Comment