होली गीत के रूप में
मना रही होली है
कुदरत भी फूलों संग
मना रही होली है
सरसों के खेत पर
बनती पीली रंगोली है
देहरी पर मस्ती में
हँस रही, फागुन की टोली है
तितली के पंखों सा
हुआ है, रेशम सा मन
टेसू के फूल जैसे
खिल उठा है हर बदन
सरसों के खेत पर
मँड रही रंगोली है
ख्वाहिश के मौसम को
महुए के गीत मिले
चेहरों पर हँसी ख़ुशी
और दोस्ती के रंग भले
मजीरों संग गूँज रही
लोक-गीतों की धुन नई
रिश्तों को मिल रही
डगर और डोर नई
सरसों के खेत पर
मँड रही रंगोली है
अम्बर ने भेजे हैं
संदेश बसंत के प्यारे
धरती ने खुद ही है
सब रंग-उमंग वारे
धड़क रहा हर आँगन
फूलों की खुशबू से
होली ने दस्तक दी
टेसू के चटकीले इन रंगों से
फसलों की पायल भी
रुनझुन कर बोल रही
चाँद की परछाई देख
ठगी सी, सरिता भी देख रही
सरसों के खेत पर
मँड रही रंगोली है
गुड़हल और गुलमोहर
हँस कर है झूम रहे
कोयल और बुलबुल भी
चहके से घूम रहे
धरती के पन्नों पर
रंग नए खेल सखी !
मौसम के सिर चढ़ता
केसरिया रंग सखी !
तस्वीरें इस जीवन की
तू रंगों से निखार ले
भूल कर गिले शिकवे
मीठे बोल से पुकार ले
कुदरत भी रंगो और फूलों संग
मना रही होली है
सरसों के खेत पर
मँड रही रंगोली है
रंगों का मधुर मेल
सिखा रही होली है
अमर खनूजा चड्ढा