मेरी डायरी के कुछ पन्ने
केवल तुम्हारे ही हैं
उनमें फ्लोरोसेंट स्याही से
लिखे हैं गीले गीले एहसास
तुमने अपने हृदय की कलम से
कोई पन्ना खुलता है
छिटक कर वे गीला करते हैं
चुपके चुपके,
आहिश्ता आहिश्ता
मेरी रूह को
क्या यही इश्क है ?
रामनारायण सोनी
१२.८.२६
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